💐 { मेरे हक में लोगों दुआ करो }💐
कहीं मंदिरों मे दिया नहीं __ कहीं मस्जिदों मे दुआ नहीं!
मेरे शहर मे हैं ख़ुदा बहुत __ मगर आदमी का पता नहीं!!
कहीं यूं न हो __ तेरे हाथ मे __ मै हवा से मिल के भड़क उठूँ!
अभी खेल मत __ मेरी राख़ से____मै सुलग रहा हूँ बुझा नहीं!!
न मै भीड़ हूँ ___ न मै शोर हूँ __ मै इसीलिए कोई और हूँ!
कई रंग आए गए मगर ___ कोई रंग ,__ मुझपे चढ़ा नहीं!!
मेरी ताज़गी से डरे हुए ___ है कई पुराने गुलाब भी!
मेरे हक़ मे लोगो दुआ करो___अभी ठीक से मै खिला नहींं!!
ये जो बोतलों मे शराब है__ ये ख़राब थी__ये ख़राब है!
इसे छोड़ दे, इसे तोड़ दे__ये किसी मरज़ की दवा नहीं!!
मुझे शेर कहना था __ कह दिया__ मुझे शेर पढ़ना था पढ़ दिया!
मुझे शोहरतों की हवस नहीं__ मुझे तालियों का नशा नही!!
शकील आज़मी जी की नज़्म
p.1