नि:शब्द हूं...🤐
माना कि सानिया की गलती थी की, उसे समझाने पर भी उसने अपने परिवार या समाज की एक ना सुनी लेकिन इसका मतलब ये तो नही की आप किसी भी बहन बेटी की इज्जत को सरेआम उछालो..🤔
MMS लीक होना देखा जाए तो अपने समाज के लिए बहुत बड़ी बात हे, लेकिन निजी लाइफ सबकी होती हे, आप और हममें से मोस्टली बंदे किसी ना किसी के अफेयर्स में मुब्तिला हैं,
एक बार अपने गिरेबान में झांक कर तो देखो 🙏
और MMS तो कुछ दिन पहले सोफिया,अंजली और एक एक्ट्रेस का भी लीक हुआ था तो क्या आप लोगों ने उन्हें रोक लिया,
सानिया की गलती से ज्यादा आप लोगों की गलती हे, वीडियो देखना कोई गलत नही हे, लेकिन स्टोरी पे लगाना घटिया मानसिकता और घटिया परवरिश को जाहिर करता है 😏
ओर ये स्टोरी लगाने वाले ज्यादातर वो लोग हैं जिन्हें गांव में पड़ोसी दावत में भी ना पूछे... आज हकीकत में इन स्टोरी वालो ने अनपढ़ता और मूर्खता का परिचय दिया है😏🤐
वैसे तो इस टॉपिक से दूर ही रहना ठीक था, क्योंकि कल से ही सब ज्ञान देने और समझाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन फिर भी खुद को लिखने से रोक नही पाया🙏🙏
डॉक्टर अब्दुल ग़फ़्फ़ार अंसारी साहब का जन्म 31 जनवरी 1939 को बिहार के भागलपुर में हुआ था। वालिद का नाम अब्दुल वाहिद अंसारी था। शुरुआती तालीम घर पर हुई, उर्दू और फ़ारसी में महारत हासिल की फिर 1957 में भागलपुर के TNB कॉलेज से फ़ारसी से बी.ए करने के बाद 1959 में पटना जा कर वहाँ की यूनिवर्सिटी से फ़ारसी में एम.ए किया और फिर 1960 में उर्दू में एक एमए किया। फिर 1961 में TNB कॉलेज में ही लेक्चरर की हैसयत से पढ़ाने लगे। पढ़ने का बहुत शौक़ था, इस लिए 1967 ईरान जा कर तेहरान यूनिवर्सिटी में दाख़िला लिया। 1968 में भागलपुर यूनिवर्सिटी से फ़ारसी में Phd किया और फिर 1976 में भागलपुर यूनिवर्सिटी से ही D.Litt किया। इसके बाद 1978 में रीडर की हैसयत से भागलपुर यूनिवर्सिटी में आ गए और 1985 में फ़ारसी के प्रोफ़्रेसर हो गए। और भागलपुर यूनिवर्सिटी के फ़ारसी शोबे के एचओडी 1998 में बने और इस पद पर रहते हुए रिटायर हुए। फ़ारसी में उनके योगदान की वजह कर भारत के राष्ट्रपति के आर नारायणन ने उन्हें सम्मानित किया।